स्ट्रीमिंग वीडियो ब्लॉग

वीडियो डाउनलोड, स्ट्रीमिंग प्रोटोकॉल और कोडेक की आसान भाषा में जानकारी। तकनीकी शब्दों का बोझ नहीं — सिर्फ़ ज़रूरी सिद्धांत, ताकि कोई भी वीडियो तकनीक समझ सके।

HLS बनाम DASH: स्ट्रीमिंग प्रोटोकॉल कैसे काम करते हैं

वेब वीडियो पर प्ले दबाने के कुछ सेकंड बाद ही वीडियो शुरू हो जाता है। इसके पीछे HLS और DASH जैसे एडैप्टिव स्ट्रीमिंग प्रोटोकॉल का काम होता है। आइए समझें कि ये कैसे चलते हैं।

H.264, H.265 और AV1: वीडियो कोडेक का छोटा-सा इतिहास

दो वीडियो, दोनों 1080p: एक 200 MB का और दूसरा सिर्फ़ 80 MB का, फिर भी गुणवत्ता लगभग समान। फर्क वीडियो कोडेक का है। H.264 से AV1 तक, आइए देखें कि कंप्रेशन कैसे बेहतर होता गया।

बिटरेट, रिज़ॉल्यूशन और गुणवत्ता: क्या 1080p हमेशा 720p से ज़्यादा साफ़ होता है?

1080p लिखा हुआ वीडियो किसी दूसरे 720p वीडियो से खराब दिख सकता है। तस्वीर की गुणवत्ता सिर्फ़ रिज़ॉल्यूशन के नंबर से तय नहीं होती — बिटरेट और कोडेक भी उतने ही ज़रूरी हैं।

4K, 8K और HDR: बेहतरीन वीडियो को समझने की शुरुआती गाइड

4K पिक्सेल की संख्या बताता है, HDR रोशनी और छाया में दिखाई देने वाली बारीकी, और फ़्रेम दर बताती है कि हर सेकंड कितने दृश्य हैं। ये तीन चीज़ें मिलकर तय करती हैं कि वीडियो कितना बेहतरीन दिखेगा।

WebCodecs: आपके ब्राउज़र का वीडियो प्रोसेसिंग इंजन

ब्राउज़र में वीडियो एडिट करना पहले लगभग असंभव था। WebCodecs API से डिकोडिंग, एन्कोडिंग और ट्रांसकोडिंग वेबपेज में ही की जा सकती है। इस साइट के तीन ऑनलाइन टूल इसी पर आधारित हैं।